गृह विभाग ने गत 16 दिसंबर को पूरे उत्तराखंड के अधिकार क्षेत्र के लिए इन मामलों के लिए अधिसूचना जारी की है। डिजिटल के डर से देश में करोड़ो करोड़ लोग ठगे जा रहे हैं।
उत्तराखंड में भी एसोसिएटेड आईटी एक्ट के मामलों की जांच कर पता लगाएं। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद उठाया गया जिसमें न्यायालय ने डिजिटल चोरी के मामलों की जांच से निष्कर्ष निकालने के आदेश दिए थे।
गृह विभाग ने गत 16 दिसंबर को पूरे उत्तराखंड के अधिकार क्षेत्र के लिए इन मामलों के लिए अधिसूचना जारी की है। डिजिटल के डर से देश में करोड़ो करोड़ लोग ठगे जा रहे हैं।
दिसंबर की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों को गंभीर बताया था। साथ ही आपदा जोखिम था कि इन मामलों में कुछ बैंक अधिकारियों की भी भूमिका हो सकती है।
ऐसे में सिक्किम में होने वाले इन अपराधों की जांच के आदेश दिए गए थे। साथ ही कहा गया था कि रॉबर्ट क्रीएटेड सर्टिफिकेशन एक्ट के तहत संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
गृह सचिव शैलेश बघौली ने बताया कि दिल्ली विशेष पुलिस अधिनियम के तहत राज्य में आईटी अधिनियम के उल्लंघन की जांच करने का अधिकार दिया गया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।
पूर्वोत्तर राज्य में होने वाले अपराध की झलक तब मिलती है जब सरकार इसका बचाव करती है। इसके अलावा उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी विभिन्न मामलों की समीक्षा की जाती है।
पिछले साल लोगों ने करीब नौ करोड़ रुपये ठगे
डिजिटल आतंकवादी गिरोह में शामिल होने का मामला वर्ष 2023 में सामने आया। उस वक्त पूरे साल में प्रदेश के अंदर सिर्फ एक मामला आया था। इसके बाद 2024 में कुल 22 लैपटॉप दर्ज किए गए जिनमें करीब 18 करोड़ रुपये ठगे गए। फिर 23 दिसंबर 2025 तक कुल 18 मामले दर्ज हुए जिनमें लोगों के नौ करोड़ रुपये ठगे गए।
हालाँकि, इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने कई मामलों का खुलासा भी किया। इनमें 2023 के इकलौते मामले में एक अपराधी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में पीड़ित के 52 हजार रुपये वापस ले लिये गये। इसी तरह 2024 के 22 मामलों में से नौ में अनपेक्षित घटना हुई।
21 अरेस्ट किए गए और 1.84 करोड़ रुपए वापस लिए गए। पिछले साल 18 मामलों में कुल छह मामलों का खुलासा हुआ, जिसमें कुल 16 गरीब बच्चे शामिल हुए। लगभग 10 लाख करोड़ रुपये वापस लाए गए।
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- नौ साल बाद हटाए गए कैबिनेट मंत्री धन सिंह से स्वास्थ्य महकमा, इन दिनों पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचारमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पांच नए उद्यमों के बीच का बंटवारा कर दिया है। चार पुराने विधानमंडल के कुछ संस्थागत में हुआ है। कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से स्वास्थ्य महकमा,
मंत्री सतपाल महाराज से सचिवालय, जलागम, एसडीओ उनियाल से तकनीकी शिक्षा एवं भाषा और गणेश जोशी से ग्राम्य विकास विभाग हटा दिए गए हैं। कैबिनेट लाइन आर्या व बोरा बहुगुणा के पास पूर्व की सामुहिक विभाग है।
मंत्री डॉ. नौ साल बाद धन सिंह रावत को स्वास्थ्य विभाग से हटा दिया गया। अब उनके पास विद्यालयी शिक्षा, उच्च, तकनीकी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा के साथ विभाग की जिम्मेदारी बनी हुई है। त्रिवेन्द्र सरकार में 2017 से डॉ. धन सिंह रावत के पास शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी थी।
धामी सरकार के मॉडल विस्तार से उनकी स्वास्थ्य महमामा को हटा दिया गया। ऍफ़. आजकल पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नौ साल में स्वास्थ्य के रेस्तरां का विस्तार करने के साथ ही डॉ.
विशेषज्ञ,सहायक अधिकारी की सेवाएं। विभाग में 10 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हैं। दुर्गम क्षेत्र में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया है।
Wednesday, May 13

