देहरादून: उत्तराखंड की सियासत इन दिनों समय से पहले विधानसभा चुनाव की चर्चाओं से गरमाई हुई है. मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 तक है, लेकिन जनवरी 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार कुंभ और उसके बाद होने वाली जनगणना को देखते हुए चुनावी टाइमलाइन को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है. हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन प्रदेश में तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम इन चर्चाओं को लगातार हवा दे रहे हैं.
खासकर सत्ताधारी बीजेपी की बढ़ी हुई संगठनात्मक सक्रियता को भी इन अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरिद्वार कुंभ जैसे विशाल आयोजन के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का बड़ा हिस्सा व्यवस्थाओं में जुटा रहता है. इसके तुरंत बाद जनगणना की प्रक्रिया भी शुरू होनी है.
ऐसे में चुनाव आयोग प्रशासनिक सुविधाओं और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए चुनावी कार्यक्रम को लेकर कोई विशेष निर्णय ले सकता है. हालांकि, अभी तक इस संबंध में किसी प्रकार की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों ने संभावित परिस्थितियों को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं
बीजेपी भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है. पार्टी नेताओं का कहना है कि बीजेपी हमेशा चुनावी मोड में रहती है और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है. बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी का कहना है कि चुनाव आयोग परिस्थितियों के अनुसार कोई भी फैसला ले सकता है, लेकिन बीजेपी हर स्थिति में चुनाव लड़ने के लिए तैयार है.
उन्होंने कहा कि बीजेपी 24×7 चुनावी मोड में काम करने वाली पार्टी है और संगठन लगातार जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. बीजेपी नेताओं के मुताबिक, हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन के उत्तराखंड दौरे के बाद संगठनात्मक गतिविधियों में और तेजी आई है. इस दौरान शीर्ष नेतृत्व ने बूथ और ग्रासरूट स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया.



