उत्तराखंड शिक्षा विभाग का भी अजब हाल है। जिन शिक्षकों या कर्मचारियों की नौकरी लगे अभी जुम्मा-जुम्मा कुछ समय ही हुआ है, वह मनचाही पोस्टिंग के लिए जुगाड़ लगाने से बाज नहीं आ रहे। विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय दीप्ति सिंह ने ऐसे कार्मिकों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन नवनियुक्त शिक्षकों–कर्मचारियों का परिवीक्षाकाल (प्रोबेशन पीरियड) अभी पूरा नहीं हुआ है, उनके स्थानांतरण या सम्बद्धीकरण के प्रयास न केवल नियम विरुद्ध हैं, बल्कि अनुशासनहीनता की श्रेणी में आते हैं।
महानिदेशालय द्वारा 3 जनवरी 2026 को जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें नवनियुक्त शिक्षक–कर्मचारी अपने मूल तैनाती स्थल से अन्यत्र स्थानांतरण या सम्बद्धीकरण के लिए विभिन्न स्तरों पर दबाव बना रहे हैं।
इतना ही नहीं, प्रतिनियुक्ति पर तैनात कर्मचारी भी नियमों को नजरअंदाज कर स्थान परिवर्तन की कोशिशों में जुटे हैं, जिससे शासकीय कार्यों में अनावश्यक व्यवधान पैदा हो रहा है।
कर्मचारी आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन
महानिदेशालय ने इस प्रवृत्ति को अत्यंत गंभीर और चिंताजनक बताते हुए साफ कहा है कि यह आचरण कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रतिकूल है। आदेश में दो टूक कहा गया है कि ऐसे शिक्षकों–कर्मचारियों को तत्काल चिन्हित कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
हर स्तर पर चिन्हांकन, कार्रवाई की जिम्मेदारी तय
महानिदेशक दीप्ति सिंह ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्तर पर ऐसे मामलों को चिह्नित किया जाए। संबंधित सक्षम नियुक्ति अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के लिए संस्तुति भेजी जाए। कार्रवाई की सूचना अनिवार्य रूप से अधोहस्ताक्षरी कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

