उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में 4जी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत 78% काम पूरा हो चुका है, जिससे राज्य के 96% हिस्से तक 4जी पहुंच गई है।
लगभग 30 हजार रुपये के बजट से इस परियोजना में रेगिस्तान को जोड़ा जाएगा, आपदा के समय में सुधार किया जाएगा और ऑफ़लाइन सेवाओं को आसानी से करोड़ बनाए जाएंगे। हालाँकि, अभी भी 600 में काम जारी है।
दवा। पहाड़ों के पहाड़ी इलाकों में शाम होते ही मोबाइल हाथ में लेकरियों की ओर से बढ़ोतरी हो रही है, इस उम्मीद में कि शायद कहीं से काल लग जाए, कहीं इंटरनेट का सिग्नल मिल जाए। पिछले कई वर्षों से अकेले ही अन्य दूरस्थ जिलों में भी यही हाल है।
बारिश हो या आपदाकाल में तो इन इलाकों का लॉजिक संपर्क प्लाजा कोलोराडो से पूरी तरह से कट होता है। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत अब हर गांव में 4-जी मोबाइल फोन से जोड़ा जा रहा है।
केंद्र सरकार की पहली वैयक्तिक प्रयोगशाला का विस्तार है। प्रदेश में दूरसंचार विभाग की विभिन्न योजनाओं पर 2.38 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन 4-जी मोबाइल नेटवर्क विस्तार योजना पर ही 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक बजट खर्च किया जा रहा है।
यह ऋषि-कर्णप्रयाग रेललाइन के लिए बजट के बाद 39 करोड़ रुपये का बजट है। सरकार का दावा है कि राज्य के करीब 96 प्रतिशत एशिया तक 4जी नेटवर्क पहुंच गया है। मोबाइल नेटवर्क विस्तार का 78 प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है।
600 में अभी तक मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचा
राज्य में कुल 15,906 गाँव हैं। आंकड़ों के अनुसार दो साल पूर्व करीब 92.5 प्रतिशत क्षेत्र में 4जी पहुंच गया था, यानी तब करीब 1,250 गांव 4जी से बाहर थे। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक करीब 600 गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाता। इनमें से कई में अब टावर का काम चल रहा है।
कई में काल करने के लिए जाना जाता है 10-15 किमी. दूर
सुपरमार्केट, बागेश्वर जैसे कई लोगों को आज भी 10 से 15 किमी तक पैदल चलना पड़ता है। कई स्थान संकेत बताते हैं कि वह स्थिर रहता है, जिससे इंटरनेट आधारित सेवाओं का कोई लाभ नहीं होता है। बारिश या ख़राब मौसम में नेटवर्क ऑपीट हो जाता है।
चिकित्सकों में औद्योगिक अध्ययन शामिल है और शेष में संपर्क साधना मुश्किल हो जाता है। टेली-मेडिसिन सेवा प्रभावित है। आपातकालीन स्थिति में काल न लीज से कई बार मरीज को समय पर सेवा नहीं मिल पाई। डिजिटल पैमाइश, ई-कर्मचारी और कामगार भी प्रभावित होते हैं। इस योजना पर विशेष रूप से काम किया जा रहा है।
“राज्य में संचार सेवाओं का विस्तार केंद्र-राज्य सरकार की पहली जिम्मेदारी है, इसलिए राज्य में इस पर अधिकतम 2.38 लाख करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है, अब आपदा हो या किसी अन्य परिस्थिति में तटरेखा-गांवों तक संवाद स्थापित किया जा रहा है। यह सब डबल इंजन की सरकार के कारण ही संभव हो रहा है।” -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
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- नौ साल बाद हटाए गए कैबिनेट मंत्री धन सिंह से स्वास्थ्य महकमा, इन दिनों पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचारमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पांच नए उद्यमों के बीच का बंटवारा कर दिया है। चार पुराने विधानमंडल के कुछ संस्थागत में हुआ है। कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से स्वास्थ्य महकमा,
मंत्री सतपाल महाराज से सचिवालय, जलागम, एसडीओ उनियाल से तकनीकी शिक्षा एवं भाषा और गणेश जोशी से ग्राम्य विकास विभाग हटा दिए गए हैं। कैबिनेट लाइन आर्या व बोरा बहुगुणा के पास पूर्व की सामुहिक विभाग है।
मंत्री डॉ. नौ साल बाद धन सिंह रावत को स्वास्थ्य विभाग से हटा दिया गया। अब उनके पास विद्यालयी शिक्षा, उच्च, तकनीकी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा के साथ विभाग की जिम्मेदारी बनी हुई है। त्रिवेन्द्र सरकार में 2017 से डॉ. धन सिंह रावत के पास शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी थी।
धामी सरकार के मॉडल विस्तार से उनकी स्वास्थ्य महमामा को हटा दिया गया। ऍफ़. आजकल पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नौ साल में स्वास्थ्य के रेस्तरां का विस्तार करने के साथ ही डॉ.
विशेषज्ञ,सहायक अधिकारी की सेवाएं। विभाग में 10 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हैं। दुर्गम क्षेत्र में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया है।
Wednesday, May 13

