राजनीति का भोथरा चेहरा है गट्टू
– पहले दिल्ली था ठिकाना, अब देवभूमि को बना दिया हरामखाना
– आखिर हराम का पैसा कहां खपाएंगे? सब धृतराष्ट्र बने देख रहे चीरहरण
लगभग दो साल पहले की बात है। एक बड़े ओहदेदार ने रात को मुझे फोन किया। उन्होंने कहा कि बहुत व्यथित हूं। मैंने कारण पूछा तो कहा, आपको पता नेता दिल्ली क्यों जाते हैं? मैंने कहा, आप बताएं। उन्होंने बताया कि एक नेताजी अपने पीए के साथ दिल्ली जाते हैं। एक काम किसी बाहरी को आवंटित करना था। नेताजी जब दिल्ली पहुंचे तो उनका इंतजाम फाइव स्टार होटल में किया गया। उनके साथ 35 साल का एक व्यापारी सौदा करने के लिए पहुंचा। उसके पिता को यह डील करनी थी। वो कहीं फंस गये। युवा व्यापारी ने एक भारी भरकम लिफापा नेताजी को सौंप दिया। इसके बाद बार में पैग-सैग हुए। डिनर के बाद होटल के वीआईपी सूइट में नेताजी लेटे और उन्होंने अपना हाथ तकिया बना लिया। नेताजी उस युवा व्यापारी से बोले, अब क्या?
युवा व्यापारी समझा कि नेताजी को पान खाना होगा शायद। पीए उसे लॉबी में ले गया और बोला, अबे पान नहीं, गर्म गोश्त। वो बेचारा घबरा गया। उसने इस तरह की डील की ही नहीं थी। पीए एक्टिव हुआ और तीन घंटे के लिए एक एयर होस्टेस को बुलाया गया। इसके बाद ही युवा व्यापारी के वर्क लैटर पर नेताजी के साइन हुए।
दिल्ली में यह सब होता ही है, लेकिन अब यह सब देवभूमि में हो रहा है। यूसीसी का मजाक बनाने वाले भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर अब भाजपा के लिए मुसीबत बन गये हैं। उनकी कथित पत्नी उर्मिला ने गट्टू के तौर पर भाजपा के एक बड़े नेता का नाम उजागर किया है कि वो संभवत अंकिता भंडारी मामले में वीआईपी था।
उत्तराखंड की राजनीति में सेक्स स्कैंडल की भरमार है। गट्टू उत्तराखंड की राजनीति का भोथरा चेहरा है। देहरादून के बड़े होटलों में नेताओं और नौकरशाहों केे 30 के 30 दिन रूम बुक रहते हैं। पहले यह समझा जाता था कि यहां रातों को दूसरी डील होती हैं, लेकिन अब समझा जा सकता है कि डील के साथ अय्याशी भी होती है। जब हराम का पैसा आता है तो उसका कुछ अंश इस तरह ही होगा। दुर्भाग्य यह है कि गट्टू सब बेकसूर होते हैं, क्योंकि हमाम में सब नंगे होते हैं। सब धृतराष्ट्र बने चीरहरण देख रहे हैं।
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- नौ साल बाद हटाए गए कैबिनेट मंत्री धन सिंह से स्वास्थ्य महकमा, इन दिनों पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचारमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पांच नए उद्यमों के बीच का बंटवारा कर दिया है। चार पुराने विधानमंडल के कुछ संस्थागत में हुआ है। कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से स्वास्थ्य महकमा,
मंत्री सतपाल महाराज से सचिवालय, जलागम, एसडीओ उनियाल से तकनीकी शिक्षा एवं भाषा और गणेश जोशी से ग्राम्य विकास विभाग हटा दिए गए हैं। कैबिनेट लाइन आर्या व बोरा बहुगुणा के पास पूर्व की सामुहिक विभाग है।
मंत्री डॉ. नौ साल बाद धन सिंह रावत को स्वास्थ्य विभाग से हटा दिया गया। अब उनके पास विद्यालयी शिक्षा, उच्च, तकनीकी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा के साथ विभाग की जिम्मेदारी बनी हुई है। त्रिवेन्द्र सरकार में 2017 से डॉ. धन सिंह रावत के पास शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी थी।
धामी सरकार के मॉडल विस्तार से उनकी स्वास्थ्य महमामा को हटा दिया गया। ऍफ़. आजकल पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नौ साल में स्वास्थ्य के रेस्तरां का विस्तार करने के साथ ही डॉ.
विशेषज्ञ,सहायक अधिकारी की सेवाएं। विभाग में 10 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हैं। दुर्गम क्षेत्र में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया है।
Wednesday, May 13

