सुद्धोवाला क्षेत्र में टोंस नदी पर चल रही ट्रेन एक बार फिर से भीषण में फंस गई है। वर्षाकाल के बाद नदी में प्राकृतिक तत्वों के चुगान की मात्रा मिलने के बावजूद स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षाकाल में नदी के प्राकृतिक प्रवाह से मिट्टी की बर्बादी की जा रही है। इससे त्रिलोकपुरम सहित आस-पास के विभिन्न जीवों के भविष्य में भारी जान-माल की क्षति का खतरा गहरा हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी साल के दौरान टोंस नदी में भीषण बाढ़ ने नंदा के घर स्थित पुल को ध्वस्त कर दिया था। उस दौरान एक शक्तिशाली कार्य में लगी अवशेष-ट्रॉली भी बह गई थी और जनहानी की घटनाएं भी सामने आईं। तब भी अवैध और मानक से अधिक खनन को बाढ़ के विनाश का बड़ा कारण बताया गया था। अब सिक्कों के बाद के अवशेषों में ही बड़ी संख्या में स्टॉक-ट्रॉली, स्टॉकर और साइकल्स में दिए गए संकेत दिए गए हैं, जिनमें मानक के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जनता के बाद प्रशासन प्रबंधन पर पहुंच
रविवार को स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब त्रिलोकपुरम कॉलोनी के बड़ी संख्या में निवासी नदी के बीच चल रहे खनन कार्य को रोकने के उद्देश्य से पहुंच गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की ओर से सीनाले के मध्य भाग में चैनल का जलजमाव किया गया था, लेकिन वास्तविकता के अनुसार नदी का प्रवाह एक किनारे की ओर मुड़ गया है, जिससे नदी में सीधे तौर पर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन की टीम के अधिकारियों की सूचना पर निरीक्षण और शिकायत की जांच का निर्देश दिया गया।

