सुनील मीनार, पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था, क्षेत्रीय एवं मुख्य प्रवक्ता, पुलिस मुख्यालय द्वारा आज सरदार सरदार पटेल भवन स्थित ऑडिटोरियम में मीडिया बंधुओं के साथ प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने उत्तराखंड पुलिस की दो महत्वपूर्ण जानकारियां- आईसीजेएस (इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) 2.0 रैंकिंग में प्रथम स्थान और अंतिम महाकुंभ-2025 में उत्तराखंड पुलिस की अंतिम भूमिका की जानकारी दी।
प्रेस वार्ता में धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस उप महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था, अर्पण यदुवंशी, सेनानायक एसडीआरएफ, विशाखा अशोक भदाने- पुलिस अधीक्षक, अपराध, उत्तराखंड सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
◼️ ICJS 2.0 रैंकिंग में उत्तराखंड पुलिस देश में प्रथम
उत्तराखंड पुलिस ने एक बार फिर डिजिटल पुलिसिंग और न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण में अपनी अग्रणी भूमिका साबित की है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो – एनसीआरबी) ने मासिक रैंकिंग में सीसीटीएनएस / आईसीजेएस प्रगति सूचकांक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें उत्तराखंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पत्रिका में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
यह उपलब्धि है राज्य पुलिस की तकनीकी प्रयोगशाला, रैपिड से नए आश्रम की क्षमता और प्रदेश के सभी पुर्तगाल के समन्वित प्रयास का परिणाम।
गृह मंत्रालय द्वारा ICJS 2.0 को वर्ष 2026 तक पूर्ण रूप से लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्यों को पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और छात्र इकाइयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शामिल किया गया है।
उत्तराखंड ने इस दिशा में स्मारक प्रगति करते हुए अधिकांश स्मारकों का समय से पूर्व एकीकरण पूरा कर लिया है।
वर्तमान में जारी ICJS 2.0 रैंकिंग में उत्तराखंड को 93.46 अंक प्राप्त हुए हैं। इस रैंकिंग में हरियाणा 93.41 प्रतिशत अंक के साथ दूसरे और असम 93.16 प्रतिशत अंक के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
ICJS 2.0 के प्रभावशाली इम्पैक्ट के माध्यम से सभी आर्किटेक्चर में इसके प्रमुख उपकरणों को शामिल किया गया है, जिससे केस डायरी, डायनामिक्स, डिजिटल डायनेमिक और आर्किटेक्चर प्रक्रियाएं एक ही डिजिटल स्टेज पर समन्वित हो सकती हैं।
पुलिस अधिकारियों के व्यापक प्रशिक्षण, जांच और अभियोजन कार्य में तेजी लाई गई है। इसके अतिरिक्त “एक डेटा, एक प्रविष्टि” की अवधारणा के ढांचे में सीसीटीएनएस, ई-कोर्ट, ई-प्रिज़न सहित विभिन्न न्यायिक समन्वय समन्वय स्थापित किया गया है।
◼️ अनौपचारिक महाकुंभ -2025 में उत्कृष्ट सेवा के लिए ज्वालामुखी की भीड़ के मध्य सुरक्षित, सुव्यवस्थित और प्लास्टिक ऑपरेशन सुरक्षा करने के लिए उत्तर प्रदेश शासन के विशेष आग्रह पर उत्तराखंड के अखंड ज्वालामुखी की एक कंपनी बनाई गई।
सेनानायक आर्किटेक्चरल इंजीनियर्स के नेतृत्व में 112 जूनियर इंजीनियर्स इंजीनियर्स दल दिनांक 24 जनवरी से 27 फरवरी तक संगम नोज सहित अन्य अतिशयोक्तिपूर्ण आर्किटेक्चरल आर्किटेक्चर द्वारा निर्मित, प्राथमिक उपचार,
लापता मछुआरों की सहायता, समन्वित बंधक श्रमिकों और अन्य आवश्यक सेवाओं में पूर्ण निष्ठा, निर्देश, दान और तत्परता के साथ उत्कृष्ट साहस का प्रदर्शन किया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित इस स्मारकीय सेवा एवं स्मारकीय पत्र को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चित्रित किया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त मेडल एवं संक्षिप्ति पत्र सुनील कुमार मीना, पुलिस महानिरीक्षक द्वारा असंबद्ध अधिकारियों एवं निर्णयों को प्रदान किया गया।
इस उपलब्धि पर दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड ने सीसीटीएनएस टीम सहित उत्तराखंड पुलिस के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयास, तकनीकी नवाचार और सतत निगरानी का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि आईसीजेएस 2.0 के प्रभावी वैज्ञानिक अनुसंधान प्रक्रिया को अधिक सीमित, समयबद्ध एवं प्रमाण-आधारित होगा, जिससे न्याय प्रणाली को नई गति मिलेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा ICJS 2.0 के उन्नत मॉड्यूल- ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति आदि के व्यापक उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे राज्य में डिजिटल न्याय प्रणाली और अधिक संवाद होंगे।
नामांकित महाकुंभ-2025 के अंतर्गत उत्तराखंड के सैनिकों को उत्कृष्ट, अनुशासित एवं समर्पित सेवाओं की ओर से नियुक्त किए गए पुलिस अधीक्षक द्वारा चित्रित किया गया।
उन्होंने जल पुनर्विलोकन, भीड़ प्रबंधन एवं जनसेवा के क्षेत्र में अंतिम रूप से चयनित व्यक्तियों की भूमिका को भविष्य में भी इसी प्रकार निष्ठा, तत्परता एवं पेशेवरों के साथ मिलकर काम करते रहने की सलाह दी।

