कभी-कभी जीवन में एक क्षण ऐसा आता है जब हमारी ज़ुबान हमारे दिल से आगे निकल जाती है।
डॉ हरक सिंह रावत से भी एक ऐसी ही अनजानी भूल हो गई। एक ऐसी गलती, जिसका इरादा कभी भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं था।
सिख पंथ दुनिया की सबसे उदार, सबसे बहादुर और सबसे क्षमाशील परंपराओं में से एक है।
गुरु साहिबान ने हमें सिखाया कि—
“गलती इंसान से होती है, और क्षमा वही देता है जिसके हृदय में विशालता हो।”
हरक सिंह रावत इस घटना से बेहद दुखी हैं। हरक सिंह रावत गुरुद्वारा पोंटा साहिब पहुंचे , जो श्री गुरु गोविन्द सिंह जी का पवन स्थान है। सिख परंपरा के प्रति श्रद्धा रखते हुए उन्होंने गलती से बोले गए उनके शब्दों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब से माफ़ी माँगीऔर पश्चाताप व्यक्त करते हुए जोड़ा घर (जहाँ संगत के जूतों होते हैं) की सेवा की और लंगर रसोई में सेवा की। उन्होंने गुरु साहिब की हाज़िरी में अरदास कर सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगी हैं और गुरु साहिब के चरणों में प्रसाद अर्पित किया। वे सिख समुदाय के प्रति अपार सम्मान रखते हैं और आज वे आत्मग्लानि से भरे हुए हैं कि
उनके शब्दों ने किसी की श्रद्धा को चोट पहुँचाई।
उनका चरित्र, उनका जीवन, और उनकी सोच—
कभी भी किसी धर्म, किसी पंथ या किसी भाईचारे के खिलाफ नहीं रही।
मैं आप सभी महानुभावों से निवेदन करता हूँ—
कृपया इस छोटी-सी अनजानी गलती को
अपने वडियापन, दयालुता, और सिख पंथ की क्षमा परंपरा के आधार पर माफ़ करें।
सिखों का इतिहास त्याग, वीरता, सेवा और “सबका भला” का संदेश देता है।
उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए
मैं दिल से अनुरोध करता हूँ कि
मेरे मित्र हरक सिंह रावत को क्षमा प्रदान करें।
हम सब इंसान हैं,
और अगर इंसानियत का सबसे बड़ा गुण कोई है—
तो वह है क्षमा।
वाहे गुरु सभी पर कृपा बनाए रखें।
ਚਰਦੀ ਕਲਾਂ ਵਿਚ ਰੱਖਣ।


