
उत्तराखंड सरकार के सहायक कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। इनमें से नियमितीकरण की कट-ऑफ डेट 2018 से 2022 तक जा सकती है। पीएचडी विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है,
जिसे सचिवालय उप-समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस कदम से वे साइंटिस्ट रेलवे फर्मों के अधीन हैं, जो नियमित रूप से कार्यरत नहीं हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों को स्थायी नौकरी मिल जाती है।
समुच्चय: प्रदेश में विभिन्न जंगलों में हजारों नागरिकों को सरकारी बड़ी राहत मिल सकती है। अब इन नियमितीकरण की कटऑफ तिथि वर्ष 2018 से वर्ष 2022 तक की जा सकती है।
इसके लिए कच्चे माल विभाग का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को साजो-सामान और उपनल मंडल के संबंध में ज़ुकार्टा की उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में वर्ष 2018 से लेकर दस वर्षों तक निरंतर सेवा पूर्ण करने वाले सिद्धांतों को नियमित करने का प्रचार-प्रसार किया है।
इस निर्णय के क्रम में अलग-अलग स्थानों पर नियमितता की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में ऐसे समान साइंटिस्ट सेरेमनी जारी की गई, जो कि वर्ष 2019 के दसवें वर्ष की सेवा पूरी तरह से है। अब सरकारी समय सीमा बढ़ाने के लिए आधिकारिक विज्ञप्ति जारी करने पर विचार कर रही है।
वास्तविक, सांविधिक प्रमाणन के लिए वर्ष 2013 में जो नियमावली बनाई गई थी। इसी अवधि में पांच वर्ष की सेवा तक पूरी तरह से लोगों की नियमित करने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों ने इसका लाभ उठाया लेकिन कुछ रिक्तियों की वजह से उनके सहायक संविदा कर्मियों से रह गए थे।
वर्तमान में जो रसायन विज्ञान नियमावली जारी की गई है उसमें भी वर्ष 2008 तक एसोसिएट एसोसिएट के रूप में सेवा देने वालों को ही लाभ मिल रहा है। इसके बाद सैटिकेट में एसेट वाले इस कॉलम में नहीं आ रहे हैं। ऐसे मजदूरों की संख्या हजारों में है।
इसे देखते हुए अब सरकार के निर्देश पर स्टाफ विभाग इन स्टाफों को भी नियमित रूप से करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। हालाँकि, कटऑफ में इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका।
सचिव शैलेश बघौली ने बताया कि मठवासी नियमावलियों की व्यवस्था के अनुसार ही सरकार की उप समिति को अगला प्रस्ताव दिया जाएगा।

